
चेन्नई के एम्बुलेंस 1940

चेन्नई मरीना बीच 1913

वीटी स्टेशन मुंबई 1894

मैलापोर चेन्नई 1939

कार शोरूम चेन्नई 1913

मद्रास बैंक 1935

अंडमान 1917

ट्रेन 1895
देखो न! यह मेरी कैसी तक़दीर है, न तुम हो न तुम्हारी कोई तस्वीर है, दिन-रात तेरा ग़म ही ग़म है मुझे, सीने में साँसों की टूटी हुई ज़ंजीर है...!
2 टिप्पणियां:
आत्मीय!
वन्दे मातरम.
दिव्यनर्मदा.ब्लॉगस्पॉट.कॉम देखिये, जुड़िये, उपयुक्त लगे तो अपने चित्र व् रचनाएँ प्रकाशनार्थ दीजिये.
आपका चिटठा रोचक है. फिर आऊंगा.
Bahut achha
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